पिछले कुछ दिनों से देशभर में एक ही सवाल चर्चा में है—क्या मनरेगा योजना अब बंद होने वाली है? वजह है केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया VB–G RAM G Bill। शीतकालीन सत्र से पहले ही इस बिल की कॉपी लोकसभा सांसदों के बीच सर्कुलेट कर दी गई है और इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध भी किया गया है। ऐसे में ग्रामीण रोजगार से जुड़ा यह मुद्दा सियासत और जनता—दोनों के लिए बेहद अहम हो गया है।
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क्या है VB–G RAM G Bill?
VB–G RAM G का पूरा नाम है “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन”। सरकार का कहना है कि यह नया ग्रामीण रोजगार कानून विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप तैयार किया गया है। मौजूदा मनरेगा एक्ट करीब 20 साल पुराना हो चुका है, इसलिए सरकार अब एक नया ढांचा लाकर रोजगार गारंटी को “आधुनिक और प्रभावी” बनाना चाहती है।
सीधे शब्दों में कहें तो सरकार मनरेगा को खत्म कर उसकी जगह एक नई योजना लाने की तैयारी में है, जिसे VB–G RAM G Bill के ज़रिए लागू किया जाएगा।
VB–G RAM G बिल – आपको क्या करना पड़ेगा ?
क्या मनरेगा सच में बंद हो रही है?
तकनीकी रूप से सरकार “बंद” शब्द का इस्तेमाल नहीं कर रही, लेकिन हकीकत यह है कि मनरेगा एक्ट की जगह नया कानून लाया जा रहा है। यानी पुरानी योजना उसी नाम से आगे नहीं चलेगी। यही वजह है कि विपक्ष इसे “मनरेगा खत्म करने” के तौर पर देख रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का तर्क है कि नाम और ढांचे में बदलाव का मकसद ग्रामीण रोजगार को ज्यादा टिकाऊ बनाना है, न कि किसी ऐतिहासिक योजना को कमजोर करना।
विपक्ष का विरोध क्यों?
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर इस योजना से महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बापू के नाम से जुड़ी एक पहचान है, जिसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
नए VB–G RAM G Bill में 5 बड़े बदलाव
अब बात करते हैं उन 5 बड़े बदलावों की, जिनकी वजह से यह बिल चर्चा में है:
1️⃣ रोजगार के दिन 100 से बढ़कर 125
मनरेगा में जहां हर साल 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, वहीं नए VB–G RAM G Bill में इसे बढ़ाकर 125 दिन किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में स्थिरता आएगी।
2️⃣ अब राज्यों को भी देना होगा पैसा
अब तक मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। लेकिन नए बिल में फंडिंग पैटर्न बदल दिया गया है।
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सामान्य राज्यों में खर्च का अनुपात होगा 60:40 (केंद्र : राज्य)
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हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में यह अनुपात रहेगा 90:10
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केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा खर्च केंद्र सरकार ही उठाएगी
यानी अब राज्यों की जिम्मेदारी भी बढ़ने वाली है।
3️⃣ बजट अब “मानक आवंटन” से तय होगा
पहले लेबर बजट के आधार पर राशि तय होती थी, लेकिन नए बिल के तहत राज्यवार मानक बजट तय किया जाएगा। हर वित्त वर्ष से पहले केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किस राज्य को कितना फंड मिलेगा।
4️⃣ खेती के मौसम में 60 दिन नहीं मिलेगा काम
किसानों की बुवाई और कटाई के समय मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए हर साल 60 दिन ऐसे होंगे जब इस योजना के तहत रोजगार नहीं दिया जाएगा। यह अवधि राज्य सरकारें अपने-अपने हिसाब से तय करेंगी।
5️⃣ मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते
यह बदलाव मजदूरों के लिए सबसे राहत भरा माना जा रहा है। अभी मनरेगा में भुगतान कई बार 1–2 महीने लेट हो जाता है। नए बिल में हर हफ्ते मजदूरी भुगतान का प्रावधान किया गया है, ताकि मजदूरों को समय पर पैसा मिल सके।
निष्कर्ष: फायदा या नुकसान?
VB–G RAM G Bill में जहां ज्यादा दिन का रोजगार और साप्ताहिक भुगतान जैसे सकारात्मक बदलाव हैं, वहीं राज्यों पर बढ़ता आर्थिक बोझ और महात्मा गांधी का नाम हटना राजनीतिक विवाद की बड़ी वजह बन गया है। असली सवाल यही है कि क्या यह नई व्यवस्था ज़मीन पर मजदूरों की ज़िंदगी को बेहतर बना पाएगी?
आपका क्या मानना है—यह बिल ग्रामीण भारत के लिए सही कदम है या मनरेगा की आत्मा से समझौता? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।